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Thursday, August 25, 2022

नेकी

नेकी का सलीका, कोई सीखे इन रास्तों से, 

मंजिलों तक पहुँचाते हैं, फिर भी अहसान नहीं जताते। 

Friday, July 29, 2022

जुल्फ

क्यों भटके कोई, जन्नत की तलाश मे, 

आशियाना हो गर तेरी जुल्फों की छाँव मे।   

जुल्फ

बेअसर हो जाती है, जद्दो जहद ज़िंदगी की, 

लौट आता हूँ  जब तेरी जुल्फों की छाँव मे। 

जुल्फ

लाख गुनाहों की सज़ा, कुबूल है हमें, 

कैदखाना गर तेरी जुल्फों का बना हो। 

जुल्फ

अंदाज़ शायराना सा लगता है, इन घटाओं का, 

बूंदों ने इनकी शायद, आज भिगाया है तुझे।  

खूबसूरती

बनाके जबसे भेजा है उसने, तुझको जमीन पर, 

गुरूर तबसे करता है वो, अपने हुनर पर। 

व्यक्तित्व

 सुना था मुकद्दर अपना, खुद बनाते हैं लोग, 

    आपको जाना तो यकीं या गया। 

Sunday, June 20, 2021

पिता

शायद ही खुश हो जाए, कोई तुमसे हारकर, 

बाप सा कलेजा क्योंकि, होता नहीं सभी का। 

Monday, May 17, 2021

अपनों का संग


महफ़िलें तो तब भी थी, और अब भी हैं यारा, 

तब यारों का साथ था, अब अपनों का संग है। 



Saturday, April 24, 2021

जरा सोच के

इमारते कामयाबियों की, जरूर बनाना साथियों, 

ध्यान रहे  बस इतना, कोई आह न निकल जाए। 

Thursday, September 24, 2015

अहमियत...

कुछ तो सहारे रखिए, ज़िंदगी मे जनाब,
अपने कंधों पे कभी, जनाजे नहीं निकलते !

Friday, February 6, 2015

शक

सलामत रहे जो आशियाने, वक़्त के तूफानो मे, 
ढह गए वो सारे, शक के एक झोंके से !


Saturday, January 17, 2015

मुड़के देखना...

जब मिलता है हौसला,
आगे बढ़ने का, 
मुड़के पीछे देखना, 
तब बुरा नहीं होता ।

जब आगे होता है रोमांच,
तो पीछे, अनुभव 
जो देता, बेहतरी कोशशों को, 
और नहीं दुहराता ग़लतियाँ।

जब आगे होता है वीरान,
तो पीछे, लोगों की होड़
जो रखती, तुमे आगे 
और लक्ष्य के करीब।

जब आगे होती है मायूसी, 
तो पीछे, जज्बा
जो देता, ताकत चलने की,
और प्रेरणा, नहीं दम भरने की।

जब आगे होता है मायाजाल, 
तो पीछे, आशीष माँ बाप का,
जो नहीं भटकने देता,
और करता दृढ़ इरादों को।

जब आगे होता है भटकाव, 
तो पीछे, उम्मीदें
जो देती हैं अनुशासन,
और मन पर नियंत्रण।

जब आगे होता है लड़कपन,
तो पीछे, जिम्मेदारियां,
जो देती हैं  मर्यादा,
और रखती तुम्हे इंसान।

Thursday, January 15, 2015

दो पहलु जिंदगी के....

दो  पहलु जिंदगी के, 
एक के भरोसे कभी होना नहीं , 
डूबने का मतलब नहीं कि, 
उदय तुम्हे फिर कभी होना नहीं ... 

क्योंकि...

डूबता है रोज़, वैसे तो सूरज भी,
चमक उसकी मगर कम होती नहीं , 
और, लाख चमकें तारे गगन में, 
सूरज बिना मगर सुबह होती नहीं.... 


do pehlu zindgi ke,
ek ke bharose kabhi hona nahi,
dubne ka matlab nahi ki,
uday tumhe phir kabhi hona nahi,

kyonki,

dubta hai roz, waise to suraj bhi,
chamak uski magar, kam hoti nahi,
aur, lakh chamke tare gagan me,
suraj bina magar, subah hoti nahi…. 

Monday, January 12, 2015

चमक...

चमक हीरों की भी, फीकी पड़ जाती है, 

हर एक बूंद फिसलती है जब, उसकी ज़ुल्फों से !


chamak heeron ki bhi, feeki pad jati hai,

har ek bund fisalti hai jab, uski zulfon se !

Friday, January 9, 2015

शिकवा...

चंद दिन ही हुए अभी, दर से उनके गुज़रे,

वो ऐसे भूले हमें , मिले जैसे कभी नहीं !! 

chand din hi hue abhi, dar se unke gujre,

wo aise bhule hume, mile jaise kabhi nahi !!

Wednesday, January 7, 2015

सबब...

अब जाना हमने, सबब, इस काली रात का,

देखा नहीं उसे, कुछ दिनों से खिड़की पे !!


ab jana humne, sabab is kali raat ka,

dekha nahi use, kuchh dinon se khidki pe !!

Sunday, December 28, 2014

Daulat..

daulat neki ki bhi, thodi si kama lena, 

suna hai, 

ye kagaz ke tukde, nahi chalte uske bazar me...

Wednesday, December 17, 2014

Saleeka...

do boond aansuon ki ponchkar, jisne,
gham ke samundar me, hame dubo diya hai,

wo sikhate hain hame, jeene ka saleeka,
zindagi ne khud jinhe, thukra diya hai...

Friday, November 28, 2014

kadra maa baap ki...

kadra fir jaroor hoti, e khuda, un beparwah auladon ko,


na muft me gar bakshe hote, tune unhe maa baap.....