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Friday, July 29, 2022

जुल्फ

क्यों भटके कोई, जन्नत की तलाश मे, 

आशियाना हो गर तेरी जुल्फों की छाँव मे।   

जुल्फ

बेअसर हो जाती है, जद्दो जहद ज़िंदगी की, 

लौट आता हूँ  जब तेरी जुल्फों की छाँव मे। 

जुल्फ

लाख गुनाहों की सज़ा, कुबूल है हमें, 

कैदखाना गर तेरी जुल्फों का बना हो। 

जुल्फ

अंदाज़ शायराना सा लगता है, इन घटाओं का, 

बूंदों ने इनकी शायद, आज भिगाया है तुझे।  

खूबसूरती

बनाके जबसे भेजा है उसने, तुझको जमीन पर, 

गुरूर तबसे करता है वो, अपने हुनर पर। 

Friday, February 6, 2015

शक

सलामत रहे जो आशियाने, वक़्त के तूफानो मे, 
ढह गए वो सारे, शक के एक झोंके से !


Friday, January 9, 2015

शिकवा...

चंद दिन ही हुए अभी, दर से उनके गुज़रे,

वो ऐसे भूले हमें , मिले जैसे कभी नहीं !! 

chand din hi hue abhi, dar se unke gujre,

wo aise bhule hume, mile jaise kabhi nahi !!

Wednesday, January 7, 2015

सबब...

अब जाना हमने, सबब, इस काली रात का,

देखा नहीं उसे, कुछ दिनों से खिड़की पे !!


ab jana humne, sabab is kali raat ka,

dekha nahi use, kuchh dinon se khidki pe !!

Tuesday, May 20, 2014

ख़्वाहिश...

वैसे तो, हर ख़्वाहिश अपनी पूरी है,

फिर भी ज़िंदगी ये लगती, अधूरी है,

ये कमी भी शायद, हो जाए पूरी,

बस आना तेरा, मेरी ज़िंदगी मे जरूरी है।


 waise to, har khwahish apni puri hai,

phir bhi zindagi ye lagti, adhuri hai, 

ye kami bhi shayad, ho jaye puri,

bas aana tera,  meri zindagi me zaruri hai.