दो पहलु जिंदगी के,
एक के भरोसे कभी होना नहीं ,
डूबने का मतलब नहीं कि,
उदय तुम्हे फिर कभी होना नहीं ...
क्योंकि...
डूबता है रोज़, वैसे तो सूरज भी,
चमक उसकी मगर कम होती नहीं ,
और, लाख चमकें तारे गगन में,
सूरज बिना मगर सुबह होती नहीं....
do pehlu zindgi ke,
एक के भरोसे कभी होना नहीं ,
डूबने का मतलब नहीं कि,
उदय तुम्हे फिर कभी होना नहीं ...
क्योंकि...
डूबता है रोज़, वैसे तो सूरज भी,
चमक उसकी मगर कम होती नहीं ,
और, लाख चमकें तारे गगन में,
सूरज बिना मगर सुबह होती नहीं....
do pehlu zindgi ke,
ek ke bharose kabhi hona nahi,
dubne ka
matlab nahi ki,
uday
tumhe phir kabhi hona nahi,
kyonki,
dubta
hai roz, waise to suraj bhi,
chamak
uski magar, kam hoti nahi,
aur,
lakh chamke tare gagan me,
suraj bina magar, subah hoti nahi….
suraj bina magar, subah hoti nahi….
No comments:
Post a Comment