गुनगुनाती कलम
अल्फ़ाज़ों में बयां होते हैं, कभी खुशी तो कभी ग़म, इन्हें रचनाओं में पिरोती, मेरी "गुनगुनाती कलम"
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Thursday, September 24, 2015
अहमियत...
कुछ तो सहारे रखिए, ज़िंदगी मे जनाब,
अपने कंधों पे कभी, जनाजे नहीं निकलते !
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