अल्फ़ाज़ों में बयां होते हैं, कभी खुशी तो कभी ग़म, इन्हें रचनाओं में पिरोती, मेरी "गुनगुनाती कलम"
शायद ही खुश हो जाए, कोई तुमसे हारकर,
बाप सा कलेजा क्योंकि, होता नहीं सभी का।
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