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Tuesday, March 1, 2016

भूमिका...

बधाई हो! घर में “बेटी” आयी है,
भाइयों की ख़ातिर एक “बहिन” आयी है,
बहिनों की प्यारी एक “सहेली” आई है…

फिर लक्ष्मी बनकर, घर में “बहू” आयी है,
“पत्नी” बनकर साथ निभाने आयी है,
रुठों को मनाने, एक “भाभी” आयी है...

“सास” बनकर, परंपरा बताने आयी है,
बड़ी बहिन का प्यार “जेठानी” लायी है,
“देवरानी” खुद हाथ बटाने आयी है,
नौक झोंक थोड़ी सी, “ननद” लायी है…

“माँ” बनकर, ममता फैलाने आयी है,
रिश्तों की बेल, आगे बढ़ाने आयी है,  
कभी बनती “मौसी”, कभी बनती “मामी”
“चाची” है कभी तो, कभी बनी “ताई” है...

रिश्तों के नन्हें अंकुरण सीचने,
झुर्री वाली “दादी” आयी है,
अनुभवो को जीकर, “नानी”

सुनाने ये, कहानी आयी है...

2 comments:

  1. बहुत सुन्दर रचना ... सब कुछ होती है बेटी और बेटी जीवन का आधार होती है ...

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    1. धन्यवाद सर!अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को समर्पित!

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