अल्फ़ाज़ों में बयां होते हैं, कभी खुशी तो कभी ग़म, इन्हें रचनाओं में पिरोती, मेरी "गुनगुनाती कलम"
वाह ... क्या बात है .. सच में कागज़ के टुकड़े काम नहीं आते ...
जी सर :)
वाह ... क्या बात है .. सच में कागज़ के टुकड़े काम नहीं आते ...
ReplyDeleteजी सर :)
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