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Saturday, January 17, 2015

मुड़के देखना...

जब मिलता है हौसला,
आगे बढ़ने का, 
मुड़के पीछे देखना, 
तब बुरा नहीं होता ।

जब आगे होता है रोमांच,
तो पीछे, अनुभव 
जो देता, बेहतरी कोशशों को, 
और नहीं दुहराता ग़लतियाँ।

जब आगे होता है वीरान,
तो पीछे, लोगों की होड़
जो रखती, तुमे आगे 
और लक्ष्य के करीब।

जब आगे होती है मायूसी, 
तो पीछे, जज्बा
जो देता, ताकत चलने की,
और प्रेरणा, नहीं दम भरने की।

जब आगे होता है मायाजाल, 
तो पीछे, आशीष माँ बाप का,
जो नहीं भटकने देता,
और करता दृढ़ इरादों को।

जब आगे होता है भटकाव, 
तो पीछे, उम्मीदें
जो देती हैं अनुशासन,
और मन पर नियंत्रण।

जब आगे होता है लड़कपन,
तो पीछे, जिम्मेदारियां,
जो देती हैं  मर्यादा,
और रखती तुम्हे इंसान।

2 comments:

  1. जब आगे होती है मायूसी,
    तो पीछे, जज्बा
    जो देता, ताकत चलने की,
    और प्रेरणा नहीं दम भरने की।
    सुन्दर , प्रेरणादायक शब्द

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद सारस्वत जी :)

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