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Saturday, December 27, 2025

पथिक

मैं रास्तों का आनंद लेता हूँ,

मंजिलों की चिंता नहीं सताती है।  

          जब मंजिलों की चाह न हो,

          यात्रा ही मंजिल बन जाती है।

 

मैं धूप का आनंद लेता हूँ,

दुपहरी की चिंता नहीं सताती है।

          जब सूरज से दोस्ती हो,

          जिंदगी छांव बन जाती है।

 

फूलों की चाह नहीं है,

काँटों की चिंता नहीं सताती है,

          जब छालों की फिक्र न हो,

          जिंदगी फूलों की सेज बन जाती है। 

 

खोने की फिक्र नहीं है,

पाने की चिंता नहीं सताती है,

          जब सबकुछ उसी का हो,

          ये चाह “माया” बन जाती है।      

 

मान की चाह नहीं है।

अपमान की चिंता नहीं सताती है।

          जब मान-अपमान मे संयम हो,

          जिंदगी स्वर्ग बन जाती है। 

Thursday, May 13, 2021

हो जिंदा जब तक, मरना मत।


ऑक्सिजन चाहे घट भी जाए , 

या कमजोरी छा सी जाए, 

कोरोना सी मुश्किल का, 

सामना करते डरना मत, 

इतना याद रहे मेरे साथी, 

हो जिंदा जब तक, मरना मत। 


चाहे धड़कन रुकती जाए, 

या गिनती साँसों की कम जाए, 

दिल और मन को अपने,

कंट्रोल से बाहर करना मत, 

इतना याद रहे मेरे साथी, 

हो जिंदा जब तक, मरना मत। 


निकट लगे, जब अंत तुम्हारा, 

घिर आए निराशा का अँधियारा, 

जीना है जिनके लिए, 

दूर ध्यान से, उन्हे करना मत,

इतना याद रहे मेरे साथी, 

हो जिंदा जब तक, मरना मत। 

Sunday, August 4, 2019

वो दोस्त बहुत याद आते हैं


जब पास हों तो,
        आकर सता जाते हैं,
जब दूर हो जाएँ तो,
        रुला जाते हैं,
वो दोस्त बहुत याद आते हैं।

सुनते हैं मेरे दिल की बातें,
        अपनी भी सुना जाते हैं,
अकेलेपन को भगाने,
        उठकर चले आते हैं,
वो दोस्त बहुत याद आते हैं।

रूठ जाऊँ अगर कभी तो,
        मनाने चले आते हैं,
आँसू जो छलके कभी,
        पोंछने दौड़े आते हैं।
वो दोस्त बहुत याद आते हैं।

पहले प्यार की बातों को
        शर्माकर बताते हैं,
टूटे हुए दिल को लेकर,
        रोने चले आते हैं।
वो दोस्त बहुत याद आते हैं।

सुबह की गहरी नींद को,
        पानी डालकर भगाते हैं,
नींद न आए अगर रात मे,
        बोर करने चले आते हैं,
वो दोस्त बहुत याद आते हैं।

बर्थड़े हो या,
        कोई हंसी शाम हो,
हर महफ़िल को,
        रंगीन बनाते हैं,
वो दोस्त बहुत याद आते हैं।

जब बात हो,
        मरने या मारने की,
सबसे पहले,
        साथ आ जाते हैं,
वो दोस्त बहुत याद आते हैं।

झगड़ा हो स्कूल का,
        अपना फर्ज़ निभाते हैं,
पीटते हैं साथ मिलकर,
        कभी खुद पिटकर आ जाते हैं,
वो दोस्त बहुत याद आते हैं।


फ्रिज से ठंडी,
        पानी की बोतल,
छुप छुप कर,
        दोस्तों को पिलाते हैं,
वो दोस्त बहुत याद आते हैं।

सोचता हूँ कभी भी,
        उनके बारे मे,
आँखों को मेरी,
        नम कर जाते हैं।

वो दोस्त “आज” भी याद बहुत आते हैं।