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Sunday, November 6, 2022

प्रार्थना

धन्यवाद करते हैं, कोटि तुम्हें हम,
इतना सब कुछ जो तुमने दिया
नई सुबह का भान दिया
जिंदगी का प्यार गान दिया

मानव रूप में जन्म दिया
स्वस्थ तन और मन दिया
नभ, जल, वायु, पृथ्वी, अग्नि का उपहार दिया,
साँसें चलें जिसमे वो संसार दिया

रोटी कपड़ा और मकान दिया
जरूरी था वो सब सामान दिया
हंसता सा परिवार दिया
रिश्तों का संसार दिया

बुद्धि दी और ज्ञान दिया
भौतिक जगत में सम्मान दिया
वैभव, सुख और धन दिया
जीविका का साधन दिया

धन्यवाद करते हैं कोटि तुम्हें हम,
इतना सब कुछ जो तुमने दिया 

Monday, September 19, 2022

"तनिष्का" बहुत बधाई हो


आज जो चेहरे खिले हुए हैं, 

सारे दिल जो मिले हुए हैं।  

 

आज जो रौनक सी छाई है, 

रंगत बन कर घर आई है। 

 

आज जो रिश्ते झूम रहे हैं, 

और मचा सी जो धूम रहे है। 

 

आज जो खुशियां झलक रहीं है, 

और आँखों से जो छलक रही हैं। 

 

आज जो सारे दुःख भूल रहे है, 

और गर्व से सीने फूल रहे हैं। 

 

आज जो बधाइयाँ आ रही है, 

सफल होकर वो तुम्हें पा रही है। 

 

आज जो क्षण (अनमोल), ये तुम लाई हो,

हर दिल कहे, "तनिष्का" बहुत बधाई हो। 

Friday, September 9, 2022

कोटि कोटि आभार

कोटि कोटि आभार,
हे माधव, कोटि कोटि आभार,
मानव जाति को दे दिया तुमने
गीता का उपहार। 
                        कोटि कोटि आभार  

कौन हूँ मैं? क्या उद्देश्य है मेरा?
कौन है करता ये, साँझ सवेरा?
कौन छेड़ता जीवन रूपी 
साँसों की झंकार?
                    कोटि कोटि आभार

कौन है लेता जन्म यहाँ पर?
कौन है करता, कर्म यहाँ पर?
क्यों लेते हैं भिन्न भिन्न रूप मे,
परमेश्वर अवतार?
                    कोटि कोटि आभार

मोक्ष है क्या और मुक्ति है क्या?
विश्वरूप परमेश्वर की भक्ति है क्या?
परमधाम पर तुम्हारे पभू?
है किसका अधिकार?
                    कोटि कोटि आभार

और भी थे जो प्रश्न हमारे,
दे दिए तुमने उत्तर सारे,
मानव जाति को राह बताने 
और हमारे कष्ट मिटाने,
हम भक्तों को दे दिया तुमने,
गीता का सार
                    कोटि कोटि आभार

गीता के माध्यम से तुमने, 
जीवन कला सिखाई,
परमात्मा की भव्य सत्यता, 
तुमने ही है हमे बताई। 
और बता दिया है प्रभु जी, 
कौन है इस जगत का आधार। 
                कोटि कोटि आभार


Monday, September 5, 2022

शिक्षक दिवस


करता हूँ नमन उस माँ को, 

गिरकर -उठना 

जिसने है सिखाया। 


करता हूँ नमन उस पिता को,

औरों के लिए  जीना 

जिसने है बताया। 


करता हूँ नमन उन शिक्षक को, 

ज्ञान ज्योत को 

जिसने है जगाया। 


करता हूँ नमन उन मित्रों को, 

जीत की खातिर लढना 

जिसने है सिखाया।