अल्फ़ाज़ों में बयां होते हैं, कभी खुशी तो कभी ग़म, इन्हें रचनाओं में पिरोती, मेरी "गुनगुनाती कलम"
करता हूँ नमन उस माँ को,
गिरकर -उठना
जिसने है सिखाया।
करता हूँ नमन उस पिता को,
औरों के लिए जीना
जिसने है बताया।
करता हूँ नमन उन शिक्षक को,
ज्ञान ज्योत को
जिसने है जगाया।
करता हूँ नमन उन मित्रों को,
जीत की खातिर लढना
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