हे माधव, कोटि कोटि आभार,
मानव जाति को दे दिया तुमने
गीता का उपहार।
कोटि कोटि आभार
कौन हूँ मैं? क्या उद्देश्य है मेरा?
कौन है करता ये, साँझ सवेरा?
कौन छेड़ता जीवन रूपी
साँसों की झंकार?
कोटि कोटि आभार
कौन है लेता जन्म यहाँ पर?
कौन है करता, कर्म यहाँ पर?
क्यों लेते हैं भिन्न भिन्न रूप मे,
परमेश्वर अवतार?
कोटि कोटि आभार
मोक्ष है क्या और मुक्ति है क्या?
विश्वरूप परमेश्वर की भक्ति है क्या?
परमधाम पर तुम्हारे पभू?
है किसका अधिकार?
कोटि कोटि आभार
और भी थे जो प्रश्न हमारे,
दे दिए तुमने उत्तर सारे,
मानव जाति को राह बताने
और हमारे कष्ट मिटाने,
हम भक्तों को दे दिया तुमने,
गीता का सार
कोटि कोटि आभार
गीता के माध्यम से तुमने,
जीवन कला सिखाई,
परमात्मा की भव्य सत्यता,
तुमने ही है हमे बताई।
और बता दिया है प्रभु जी,
कौन है इस जगत का आधार।
कोटि कोटि आभार
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