Pages

Saturday, February 14, 2015

ख़ामोशी

जरुरी नहीं मोहब्बत में, इज़हार ए जुबां

मोहब्बत की इबारत है, ख़ामोशी उस ताज की ! 

Friday, February 6, 2015

शक

सलामत रहे जो आशियाने, वक़्त के तूफानो मे, 
ढह गए वो सारे, शक के एक झोंके से !


Saturday, January 17, 2015

मुड़के देखना...

जब मिलता है हौसला,
आगे बढ़ने का, 
मुड़के पीछे देखना, 
तब बुरा नहीं होता ।

जब आगे होता है रोमांच,
तो पीछे, अनुभव 
जो देता, बेहतरी कोशशों को, 
और नहीं दुहराता ग़लतियाँ।

जब आगे होता है वीरान,
तो पीछे, लोगों की होड़
जो रखती, तुमे आगे 
और लक्ष्य के करीब।

जब आगे होती है मायूसी, 
तो पीछे, जज्बा
जो देता, ताकत चलने की,
और प्रेरणा, नहीं दम भरने की।

जब आगे होता है मायाजाल, 
तो पीछे, आशीष माँ बाप का,
जो नहीं भटकने देता,
और करता दृढ़ इरादों को।

जब आगे होता है भटकाव, 
तो पीछे, उम्मीदें
जो देती हैं अनुशासन,
और मन पर नियंत्रण।

जब आगे होता है लड़कपन,
तो पीछे, जिम्मेदारियां,
जो देती हैं  मर्यादा,
और रखती तुम्हे इंसान।

Thursday, January 15, 2015

दो पहलु जिंदगी के....

दो  पहलु जिंदगी के, 
एक के भरोसे कभी होना नहीं , 
डूबने का मतलब नहीं कि, 
उदय तुम्हे फिर कभी होना नहीं ... 

क्योंकि...

डूबता है रोज़, वैसे तो सूरज भी,
चमक उसकी मगर कम होती नहीं , 
और, लाख चमकें तारे गगन में, 
सूरज बिना मगर सुबह होती नहीं.... 


do pehlu zindgi ke,
ek ke bharose kabhi hona nahi,
dubne ka matlab nahi ki,
uday tumhe phir kabhi hona nahi,

kyonki,

dubta hai roz, waise to suraj bhi,
chamak uski magar, kam hoti nahi,
aur, lakh chamke tare gagan me,
suraj bina magar, subah hoti nahi….