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Sunday, September 29, 2013

दो लोग..... (POSITIVE VS NEGATIVE)



इक हैंजो आसमां का,
सर पे बोझ लेके चलते हैं,
इक हैंजो आसमानों में,
उड़ उड़ के मचलते हैंI

इक हैं जिन्हेंखुशियों का,
अहसास नहीं होता है,
इक हैं जो ग़मों को भी,
खुशियों की तरह जीते हैI

इक हैंजो हरदम, “ऊपर” को,
नीचे से खींचते हैं,
इक हैंजो हरदमऊपर से,
नीचे” को खींचते हैंI

इक हैंजो उम्रबीत जाने की,
बात करते हैं,
इक हैंजो उम्र,
जीने की बात करते हैंI

इक हैंजो किस्मत के लिए,
खुद को बनाते रहते हैं,
इक हैंजो खुद ही ,
किस्मत बनाते रहते हैंI

इक हैंजो जूतों के लिए,
दिन भर रोते रहते हैं,
इक हैंजो पैरों के शुक्र पे,
दौड़ों को जीत लेते हैंI

इक हैंजो आंसुओं की बाढ़ में,
आशियाने उजाड़ लेते हैं,
इक हैंजो लंगर डाल के,
तूफानों को घर बना लेते हैंI

इक हैंजो अन्धेरी रात में,
घर से नहीं निकलते हैं,
इक हैंजो टिमटिम तारों को,
दिया मानकर चलते हैंI

इक हैंजो मर मर के,
धारा के अनुकूल बहते हैं,
इक हैंजो धारा के प्रतिकूल,
बहके “जीवन” जीते हैंI.........28/09/2013



Friday, August 23, 2013

मुझे जीने दो... (THE VOICE OF A GIRL)

निकलूं मैं क्यूँ बाहर,
सीने में डर को लेकर?
क्यूँ रास्तों पे चलूँ मैं,
नज़रें मेरी झुकाकर?

क्यूँ सहमी सीरहूँ मैं,
खुद अपने ही शहर में ?
क्यूँ दबी सी रहूँ मैं,
अपने ही बसर में?

क्यूँ रास्तों पे चलते मुझे,
नजरें वो घूरतीं हैं ?
क्यूँ स्वभिमान मेरा,
हर वक्त चीरतीं हैं ?

क्यूँ करूँ सफ़र मैं,
मिर्ची का स्प्रे लेकर ?
क्यूँ निकलूं मैं बाहरकिसी
सहारे को लेकर ?

क्यूँ याद नहीं होतीतुम्हे
अपनी माँबहनबेटी ?
जब जल्लादों की तरह,
इज्जत मेरी लूटी.....

मुझको भी मेरी साँसों को,
आजाद हैंये कहने दो......
अपनी ही तरह मुझको भी,
सर उठा के जीने दो... 

Monday, July 22, 2013

बूदों की भाषा... (RAINDROPS)



jagah thodi si mile jo, galon pe tumhare,
khabar koi khushi ki, layenge hum….

aur, balon se khud ko, girake tumhare,
moti kisi ke liye, ban jayenge hum

patton se girke, khali ghade me,
madhur geet koi, gungunayenge hum….

jagah thodi si mili gar, aangan me tumhare,
chhan chhan ki, dhun bhi sunayenege hum…

phir aangan se leke, naao tumhari,
samundar talak, le jayenge hum……

gire jo agar papihe ke, muh me,
pyas ek baras ki, bujhayenge hum…….

godi me seep ke, khud ko sama ke,
motiyon me khud hi, badal jayenge hum…

khaliyano me girke, kisano ke,
dard sare mitayenge hum…..

yun hi aakar, har varsh dhara pe....
khushiyan tumhe,  de jayenge hum....



Saturday, June 15, 2013

माँ... (THE MOTHER)


जिसके चरणों में सदा, होती है जन्नत,
और आशीषों से पूरी, होती है मन्नत ......
जिसकी सेवा से मिलता, वरदान है,
और जिसकी पूजा से मिलता, भगवान है...

जिसकी गोदी में ही बस, शांति मिल जाती है,
जिसकी ममता से ही बस, कान्ति खिल जाती है......   
लोरी से आती है जिसके, प्यारी सी निंदिया,
सदा नज़रों से बचाती, उसकी काजल की बिंदिया....

जिसकी ममता का कोई, नहीं मोल है,
जिसकी महिमा का कोई, नहीं बोल है......
देव-देवता भी, इससे ही आशीष पाते है
चरणों में इसके, गुरु भी शीष नवाते है.....  
     
हो सके तो इसको, कभी रुलाना नहीं,
दिल अपनी माँ का, कभी दुखाना नहीं....
रखती नहीं जो, हिसाब ममता का,
अहसान कभी अपने, इसे तुम गिनाना नहीं....