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Sunday, June 20, 2021

पिता

शायद ही खुश हो जाए, कोई तुमसे हारकर, 

बाप सा कलेजा क्योंकि, होता नहीं सभी का। 

Monday, May 17, 2021

अपनों का संग


महफ़िलें तो तब भी थी, और अब भी हैं यारा, 

तब यारों का साथ था, अब अपनों का संग है। 



Thursday, May 13, 2021

हो जिंदा जब तक, मरना मत।


ऑक्सिजन चाहे घट भी जाए , 

या कमजोरी छा सी जाए, 

कोरोना सी मुश्किल का, 

सामना करते डरना मत, 

इतना याद रहे मेरे साथी, 

हो जिंदा जब तक, मरना मत। 


चाहे धड़कन रुकती जाए, 

या गिनती साँसों की कम जाए, 

दिल और मन को अपने,

कंट्रोल से बाहर करना मत, 

इतना याद रहे मेरे साथी, 

हो जिंदा जब तक, मरना मत। 


निकट लगे, जब अंत तुम्हारा, 

घिर आए निराशा का अँधियारा, 

जीना है जिनके लिए, 

दूर ध्यान से, उन्हे करना मत,

इतना याद रहे मेरे साथी, 

हो जिंदा जब तक, मरना मत। 

Tuesday, May 11, 2021

इंसानियत सबसे बड़ी है

 

फर्क नहीं पड़ता, जिन्हे

जो ज़िद पर अब भी अड़े हैं।

और, जुदा धर्म का होने  का,

राग अलापे खड़े हैं।

 

मंदिरो और मस्जिदों,

पर जो राजनीति लड़े हैं।

गौर से देख लें वे सभी,

ये जो खौफनाक मंजर बड़े हैं।

 

सो गई है मस्जिदें सारी,

और मंदिरों पे ताले पड़े हैं,

चर्च के भी बड़े बड़े घंटे,

अब सन्नाटे मे खड़े हैं।

 

धर्म सभी इक दूजे से,

अब कोई नहीं बड़े हैं।

एक छोटे से विषाणु से, 

क्योंकि हारे सभी पड़े हैं।  

 

अब संकट के इस काल मे,

जो दिल साथ मे खड़े हैं।

हर धर्म और संप्रदाय से,

कई लाख गुना वे बड़े हैं।


Wednesday, April 28, 2021

छोटी सी बात

टूटने लगे जब भरोसा,
प्रभु से तुम्हारा,
समझ लेना, नही अटल,
निश्चय है तुम्हारा। 

वो तो करता,
निष्काम कर्म है हरदम।
स्वार्थ ने बस छीन लिया,
विश्वास है तुम्हारा। 


शेर ओ शायरी

बुरे वक्त के आने से, 
पहचान नयी हम पाते हैं। 
बिखर गए तो कंकर,
निखर गए तो हीरे कहलाते हैं। 

Saturday, April 24, 2021

जरा सोच के

इमारते कामयाबियों की, जरूर बनाना साथियों, 

ध्यान रहे  बस इतना, कोई आह न निकल जाए। 

Thursday, April 22, 2021

कोरोना से डर कैसा?

 

कोरोना का प्रभाव है,  

वो बस इतना सा होगा। 

या तो इससे बचे रहेंगे,  

या फिर कोरोना होगा।  

 

बचे रहे तो डर नहीं,  

और होने पर ये होगा,  

या तो हम जी जाएंगे

या फिर मरना होगा।   

 

जी गए तो कोई डर नहीं,  

मरने पर ये होगा।  

या तो भव तर जाएंगे

पुनर्जन्म या फिर होगा।  

 

भव तर गए तो डर नहीं,  

पुनर्जन्म पर ये होगा।  

या तो मनुष्य बनेगे फिर से,  

कुछ और या बनना होगा।  

 

कुछ और बने तो डर नहीं,  

मनुष्य बने तो ये होगा,  

या तो कोरोना खत्म होगा,  

या फिर से ये होगा।  

 

खत्म हुआ तो डर नहीं,  

हुआ तो फिर ये होगा।  

या तो बात समझ जाओगे,  

ऊपर से या फिर पढ़ना होगा।  


Tuesday, April 20, 2021

लगता है शहर मे नेता जी आ रहे हैं

 

लगने लगी है झाड़ू,

अब, कचरा भी उठा रहे हैं।

महीनों से पड़े हुए गड्ढे,

वो आकर बुझा रहे हैं।

और दीवारों को धोकर,

फिर से सूखा रहे हैं।

लगता है शहर मे फिर से,

नेता जी आ रहे हैं।

 

डिवाइडर पर पड़ी,

झड़ियों को हटा रहे हैं,

मनभावन और नए,

पौधे लगा रहे हैं।

और हरी भरी झड़ियों के,

सिर मुंडवा रहे हैं।

लगता है शहर मे फिर से,

नेता जी आ रहे हैं।

 

गिरे हुए साइन बोर्ड,

वो फिरसे लगवा रहे हैं।

टूटे हुए सिग्नल फिर,

जगमगा रहे हैं।

स्पीड ब्रेकर भी,

खिलखिला रहे हैं।

लगता है शहर मे फिर से,

नेता जी आ रहे हैं।

कोरोना से जंग


 ये माना घड़ी,

मुश्किलों की बड़ी है।

कोरोना की समस्या,

सामने खड़ी है।

 

ये भी माना, ये जंग,

बहुत बड़ी है।

मगर याद रहे,

जो बात बड़ी है।

 

कहने की अब जरूरत,

आन पड़ी है।

हौसले न हारने,

की ये घड़ी है।

 

क्योंकि, जीती हैं सारी,

जो भी अभी तक,

जंगे वो सारी, हमने,

हौसलों से लड़ी है।

Sunday, April 18, 2021

क्योंकि मैं एक बैंकर हूँ।



चले आते हो अपनी,

गाढ़ी कमाई को लेकर।

और जाते हो जैसे,

चिंता पराई सी देकर।

सहेजता हूँ धन को,

मानो जैसे एक "अभयंकर" हूँ।

क्योंकि मैं एक "बैंकर" हूँ।  


मुफ्त नहीं धन,

तुम्हारा हूँ लेता।

ब्याज ही नहीं,

हूँ सुरक्षा भी देता।

हरदम “कटाक्ष विष”,

पीने वाला "शंकर" हूँ।

क्योंकि मैं एक "बैंकर" हूँ।

 

“सार्थक तुम्हारे,

धन को हूँ कर देता।

"ऋण" जरूरत मंद,

को हूँ जब देता।

फिर भी मानो, सबके लिए,

रास्ते का एक कंकर हूँ।

क्योंकि मैं एक "बैंकर" हूँ।

 

चोरों और बुरी नज़रों,

से हूँ बचाता।

बेफिक्री और गहरी,

नींद तुम्हें हूँ सुलाता।

भय, चोरी, बेईमानी से बचाता,

एक मजबूत "बंकर" हूँ।

क्योंकि मैं एक "बैंकर" हूँ।

 

यूं ही नहीं कोई,

सर्वस्व है छोड़ जाता।

नित्य चले वो रिश्ता,

है जोड़ जाता।

प्रतीक, भरोसे और विश्वास का,

एक सरल सा "एंकर" हूँ।

क्योंकि मैं एक "बैंकर" हूँ।