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Tuesday, May 11, 2021

इंसानियत सबसे बड़ी है

 

फर्क नहीं पड़ता, जिन्हे

जो ज़िद पर अब भी अड़े हैं।

और, जुदा धर्म का होने  का,

राग अलापे खड़े हैं।

 

मंदिरो और मस्जिदों,

पर जो राजनीति लड़े हैं।

गौर से देख लें वे सभी,

ये जो खौफनाक मंजर बड़े हैं।

 

सो गई है मस्जिदें सारी,

और मंदिरों पे ताले पड़े हैं,

चर्च के भी बड़े बड़े घंटे,

अब सन्नाटे मे खड़े हैं।

 

धर्म सभी इक दूजे से,

अब कोई नहीं बड़े हैं।

एक छोटे से विषाणु से, 

क्योंकि हारे सभी पड़े हैं।  

 

अब संकट के इस काल मे,

जो दिल साथ मे खड़े हैं।

हर धर्म और संप्रदाय से,

कई लाख गुना वे बड़े हैं।


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