लगने लगी है झाड़ू,
अब, कचरा भी उठा रहे हैं।
महीनों से पड़े
हुए गड्ढे,
वो आकर बुझा रहे
हैं।
और दीवारों को
धोकर,
फिर से सूखा रहे
हैं।
लगता है शहर मे
फिर से,
नेता जी आ रहे
हैं।
डिवाइडर पर पड़ी,
झड़ियों को हटा
रहे हैं,
मनभावन और नए,
पौधे लगा रहे
हैं।
और हरी भरी झड़ियों
के,
सिर मुंडवा रहे
हैं।
लगता है शहर मे
फिर से,
नेता जी आ रहे
हैं।
गिरे हुए साइन
बोर्ड,
वो फिरसे लगवा
रहे हैं।
टूटे हुए सिग्नल
फिर,
जगमगा रहे हैं।
स्पीड ब्रेकर
भी,
खिलखिला रहे हैं।
लगता है शहर मे
फिर से,
नेता जी आ रहे
हैं।
No comments:
Post a Comment