गुनगुनाती कलम
अल्फ़ाज़ों में बयां होते हैं, कभी खुशी तो कभी ग़म, इन्हें रचनाओं में पिरोती, मेरी "गुनगुनाती कलम"
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Wednesday, April 28, 2021
छोटी सी बात
टूटने लगे जब भरोसा,
प्रभु से तुम्हारा,
समझ लेना, नही अटल,
निश्चय है तुम्हारा।
वो तो करता,
निष्काम कर्म है हरदम।
स्वार्थ ने बस छीन लिया,
विश्वास है तुम्हारा।
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