Pages

Sunday, December 28, 2014

Daulat..

daulat neki ki bhi, thodi si kama lena, 

suna hai, 

ye kagaz ke tukde, nahi chalte uske bazar me...

Friday, December 26, 2014

TIT FOR TAT...

Mother was crying, father was crying, brother was running behind the doctors and sister was begging to the doctors and nurse, "please please save my brother, please".

Doctors, nurses and whole the staff of the city hospital is running here and there and trying to do best possible treatment for the son of the state minister who was attacked with acid on the face. He got severe injury in the left eye and left side of the face got severely burnt. 

Today at 8 am, son was coming out of the parking lot when a stranger on a two wheeler with a mask on his face thrown a glass of acid on his face. 

The entire administration was on the job, police was trying to find out the person, doctors was trying to treat the college boy in the best manner, all news channels are showing flashing it as Breaking News... but ... no clue. Who did this and Why?

Finally, the doctor came out from operation theatre. The boy was out of danger now but doctors told them that sight of the left eye has gone permanently and the face would need plastic surgery.

One month later... still no clue of the criminal..

But at a remote place, within a closed room, a teenage girl sitting in front of photo of another teenage girl with a garland on it, with a smile on his face and tears in her eyes...perhaps she was telling that she did the justice to her.... One year back, her friend died due to acid attack by a stranger boy (stranger for everyone but known to this girl)...

Wednesday, December 17, 2014

Saleeka...

do boond aansuon ki ponchkar, jisne,
gham ke samundar me, hame dubo diya hai,

wo sikhate hain hame, jeene ka saleeka,
zindagi ne khud jinhe, thukra diya hai...

Friday, November 28, 2014

kadra maa baap ki...

kadra fir jaroor hoti, e khuda, un beparwah auladon ko,


na muft me gar bakshe hote, tune unhe maa baap.....

Wednesday, November 19, 2014

रिश्ते...

कुछ इस तरह सहेजा, रिश्तों के धागों को हमने, 
फर्ज़ अपना निभाते रहे, कर्ज़ अपना चुकाते रहे।  

Sunday, November 16, 2014

रौनक...

गर मिल ही जाती रौनक, ढूंढने से सभी को,


न भटकता कोई तनहा, कभी महफिलों में,


Wednesday, October 8, 2014

इंसानियत...

न ही तू हिन्दू है, और न ही तू मुस्लिम, 

और जो है तू, वो है तुझमे ही छुपा। 


करते हैं जो नमन, वंदना किसी मूरत की,

उठ जाते है वही हाथ, बनके किसी बंदे की दुआ। 


झुकता है जो सर, मंदिरों की दहलीज़ पर, 

करता है वही झुकके, मस्जिदों मे सजदा। 


बंद होती हैं जो आँखें, प्रार्थना के लिए, 

नमाज मे वही आँखें, बस देखती हैं खुदा।


Tuesday, May 20, 2014

ख़्वाहिश...

वैसे तो, हर ख़्वाहिश अपनी पूरी है,

फिर भी ज़िंदगी ये लगती, अधूरी है,

ये कमी भी शायद, हो जाए पूरी,

बस आना तेरा, मेरी ज़िंदगी मे जरूरी है।


 waise to, har khwahish apni puri hai,

phir bhi zindagi ye lagti, adhuri hai, 

ye kami bhi shayad, ho jaye puri,

bas aana tera,  meri zindagi me zaruri hai. 

Sunday, May 18, 2014

अपने..

अपना ही कोई दे सकता है, साथ मुसीबतों मे, 

छोड़ देता है साया, इसलिए साथ अंधरों मे! 


apna hi koi de sakta hai, saath musibaton me,

chhod deta hai saaya, isliye saath andheron me.
  

वक़्त...

सुना है क़रीब अपनों के, ये ले जातीं हैं तुम्हें, 

गुज़रना जरूर एक बार, बुरे वक़्त की गलियों से।

 
suna hai kareeb apno ke, ye le jatin hain tumhe,

guzarna zarur ek baar, bure waqt ki galiyon se...


Tuesday, May 13, 2014

तलाश...

तेरी धड़कनों से जुड़ी, मेरी हर साँस है,
तू है तो ये ज़िंदगी, भी कुछ खास है,
असर है तेरी चाहतों का, कुछ इस तरह,
हर चेहरे मे, मुझे सिर्फ तेरी "तलाश" है



teri dhadkano se judi, meri har saans hai
tu hai to ye zindagi, bhi kuchh khas hai,
asar hai teri chahaton ka, kucch is tarah,
har chehre me, mujhe sirf teri “talaash” hai 



Monday, May 12, 2014

वफ़ा....

अब यकीं नहीं होता, उनकी वफाओं का,
खुदगर्जियों को, नाम-ए-वफा देते हैं वो!

Ab yakeen nahi hota, unki wafaon ka, 

khudgarziyon ko naam-e-wafa dete hain wo !

Thursday, April 24, 2014

कश्मकश...


दर्द करे 
बयाँ अपना, कैसे कोई शायर?
दाद देते हैं सभी, उसके हर अंदाज़े बयाँ पर!

Sunday, April 13, 2014

अंजान...

याद करके, उन्हे भूल जाना, हमे नहीं आता
खुद रोते हैं मगर उनको रुलाना, हमे नहीं आता।

कैसे रहें खुश हम ?, अपनी खुशियों की खातिर,
ऐसे जश्नो को मनाना, हमे नहीं आता।

अहसानो तले उनके, तमाम उम्र बिता दी,
क्यूंकि अहसानो को जाताना, हमे नहीं आता ।

रूठे रहे वो मुझसे, तमाम उम्र मेरे यार,
क्यूंकि रूठों को मनाना, हमे नहीं आता।

यादों और ख़ाबों मे भी, सताते हैं वो,
मगर उनके ख़ाबों मे आना, हमे नहीं आता।

सोचता हूँ, रुसवा कर दूँ उन्हे इस जहां मे,
मगर दर्द को बताना, हमे नहीं आता।

बैठा हूँ अब भी, उन्ही के इंतज़ार मे,
क्यूंकि यूं ही हार जाना, हमे नहीं आता। 

Sunday, March 23, 2014

करम...


इतना सा करम मुझपे, तू कर मेरे खुदा,
या तो ज़िन्दगी दे, या ज़िन्दगी से दे बचा !

itna sa karam mujhpe, tu kar mere khuda,
ya to zindagi de, ya zindagi se de bacha!

That's all the blessing from You, my God; 
either give me life or take it away!

Monday, March 17, 2014

सुबह....


ये सोच न गुजरे कभी, मायूसियत के करीब से,
दिन ढलना होता है, आगाज़ नई सुबह का.. 

ye soch na gujare kabhi, mayusiyat ke kareeb se,
din dhalna hota hai, aagaz nai subah ka..


Never got closed to nervousness, b'coz,
A new day comes only after dark would grow!  

Tuesday, March 11, 2014

तकदीर....


ढूँढता रह गया तुझे, मैं हाथों की लकीरों में,
कोई पाके तुझे बना गया, लकीर अपने हाथों की.... 

dhundhta reh gaya tujhe, main haathon ki lakeeron me,
koi paake tujhe bana gaya, lakeer apne haath ki...

hoping, the luck would grace me with you, 
his efforts have made you his luck.... 

Saturday, March 8, 2014

पर्दानशीं...


सदियों से रातों में, यूँ ही मुस्कुरा रहा था,
ख़ूबसूरती पे अपनी, इतरा रहा था,
माना की दाग थे, मेरे इस रूप में,
मिसाल ख़ूबसूरती की, फिर भी पा रहा था...

घटने बढ़ने की, अदायें दिखा रहा था,
लाता कभी “ईद”, कभी “पूनम” बन जा रहा था,
बनके रूप यौवन का, ज़माने को दिखा रहा था,
और “घूंघट” में दुल्हन भी, बन जा रहा था,  

मगर ए खुदा, मुझे इतना दे बता,
हो गई मुझसे, क्या ऐसी खता ?
काली घटाओं में, मुझे छुपा दिया,
उस पर्दानशीं की शक्ल में,
एक और चाँद, जमीं पे ला दिया !

दुआ....


तू जिधर देखे,
वो मंज़र गुलशन बन जाए,
हर कदम तेरा,
सपनों की मंजिल बन जाए,
आज है बस इतनी सी दुआ,
तुझे इस जहाँ की हर ख़ुशी मिल जाए

Monday, March 3, 2014

गुरुवर...


हैं परम श्रद्धेय, ये "गुरुवर",
हम जिनको, शीष नवाते हैं
मंजिल पर पहुंचाकर हमको,
खुद ज्योति स्तम्भ बन जाते है।

Saturday, March 1, 2014

शुक्रिया...


बनके धूल उड़ रही थीआवारा से झोंकों के साथ,
झुकते हैं लाखों अब दर पे मेरेएक तेरे छूने के बाद....

Thursday, February 27, 2014

अजनबी... (THE STRANGER)


अपना ही साया पूछता है, अब मेरा नाम और पता,
हो गए हैं कुछ इस तरह, अजनबीहम तेरे बगैर...

Wednesday, February 26, 2014

तेरी गलियाँ....


ठोकर न कोई लग जाए, यादों की उन, कब्रों को,
रखते नहीं हम कदम, ये सोच तेरी गलियों में...  

Monday, February 24, 2014

रिवाज़... (THE CUSTOM)


तू ही बता कैसे दे दूँ ?, तुझे अपना ये दिल, 
टूटे दिलों का देना, रिवाज़ नहीं मोहब्बत का.......

Sunday, February 16, 2014

दर्द... (THE SORROW)


आदत सी, दर्द सहने की, हो गई है कुछ इस तरह, 
अपने ही ज़ख्मों को यारों, हम खुद कुरेदते रहते हैं....

Saturday, February 15, 2014

तू... (YOU)


चल रही थी तेरे साथ, कायनात, ये मेरे संग, 
न साथ हैं तेरे वगैर, खुद मेरे अपने कदम.... 


Tuesday, February 11, 2014

हौसला... (THE DETERMINATION)


आसमां भी सिमट जाते हैं, इन नन्ही मुठ्ठियों में, 
ईमानदारी जो ग़र तेरे, बुलंद हौसलों में हो.....

Sunday, February 9, 2014

शुक्रिया बेवफ़ाई...


देने चले थे जान, हम तो तेरे प्यार में, 
बचा लिया हमें मगर, कमबख्त तेरी बेवफ़ाई ने.....

ज़िद...(THE OBSTINACY)


तूफानों से कहदे कोई, न गुजरे हमारी गलियों से,
वजूद खो चुके हैं बवंडर कई, हमारी जिद के आगे.... 

Friday, February 7, 2014

तन्हाई... (THE LONELINESS)


न जिक्र करो हमसे, तुम अपनी महफिलों का,
आलम तन्हाई का, बयाँ करती है आँखें तेरी.....

उम्मीद... (THE HOPE)


बेसबब, भटकते नहीं हम, इन तनहा गलियों में,
उम्मीद है तेरे मिलने की, किसी तनहा मोड़ पे... 

Thursday, February 6, 2014

गुनहगार...



कोई उम्मीद न करे, इन्साफ की यहाँ, 

फरियादी के सिवा, यहाँ सब "गुनहगार" है....

इंतज़ार....


इक मुलाकात की, आस लगाये बैठे हैं,
आपकी याद में, हम खुदको भुलाये बैठे हैं...

यूँ तो हर कोई, यादों में बसाये बैठे है हमें,
एक आप हैं, जो हमें कबसे भुलाये बैठें हैं...

यूँ तो करता नहीं कोई, हमसे कभी गिला,
एक आप हैं, जो हजार शिकवे लगाये बैठे हैं...

यूँ तो गुजरते हैं सभी, इन राहों से,
एक आप हैं जो, नई राह बना बैठे हैं....

यूँ तो हर फरियादी को, देता है सब खुदा,
एक हम है जो, कबसे हाथ फैलाये बैठे हैं..... 

जीना...


"जीना" था उनके लिए, जिनकी "मैं" जान था, 

ये सोच, न दी जान हमने, बेवफ़ा तेरे प्यार में..... 

Sunday, February 2, 2014

सेना हिंदुस्तान की.....


सीमाओं की करते,
हरदम रखवाली (थल सेना),
भी आसमान में,
इनकी शान निराली (वायु सेना),
लहरों की खातिर, जो खेलें,
बाजी अपनी जान की (जल सेना),
है, वीरों की मतवाली टोली,
ये सेना हिंदुस्तान की....

कोई न हिन्दू- मुस्लिम इसमें,
कोई न सिख, ईसाई है,
इसके वीर जवानों ने, कसमें,
राष्ट्र-धर्म की खायीं हैं,
धर्म समझकर रक्षा करते,
मातृभूमि की शान की,
है, वीरों की मतवाली टोली, ये सेना....

जब ये जागें रात- रात भर,
तब चैन से, हम सो पाते हैं,
हो हिम की ठिठुरन, या जलन रेत की,
ये कभी नहीं घबराते हैं,
हों कैसे भी हालात, ये करते,
परवाह हमारी, जान की,
है, वीरों की मतवाली टोली, ये सेना....


सुख को भूले, दुःख को भूले,
और भुलाया, रिश्ते नातों को,
रोना भूले, हँसना भूले,
और भुलाया, जज्बातों को,
देश प्रेम का फर्ज निभाते,
फिकर नहीं, निज अरमान की,
है, वीरों की मतवाली टोली, ये सेना....


वक़्त पड़े तो, देश की खातिर,
नभ, धर, जल के रण में जाते,
इनके ताक़त, शोर्य के आगे,
दुश्मन थर थर थर्राते है,
कर गये छल्ली, दुश्मन का सीना,
आहुति या फिर, दे दी अपने प्राण की,
है, वीरों की मतवाली टोली, ये सेना....

आओ मिलके सब साथ में आयें,
हम भी अपना फ़र्ज़ निभायें,
वीर जवानों की शहादतें,
हम में से, कोई भूल ना पायें,
जब लहराये तिरंगा”,  गगनो में,
हों यादें दिल में, बलिदान की,   
है, वीरों की मतवाली टोली, ये सेना हिंदुस्तान की....

जय हिन्द...

Friday, January 31, 2014

ये कैसी काबिलियत !



तेरे आने से पहले,
ठोकरें, मैं खा चूका था,
काबिलियत के सदमे,
दिल में दबा चुका था....

तेरे आने को, हमने,
एक कसौटी समझा था,
आवाज दिल की, इसलिए शायद,
मैं, न समझा था...

काबिलियत का एक जूनून,
सर पे सवार था,
मान बैठा, इसलिए शायद,
कि, न तुझसे प्यार था,

तेरा मिलना, हमने सहारे,
किस्मत के, छोड़ दिया था,
तन मन धन, ये सब,
काबिलियत पे झोक दिया था..

मिलना तेरा, आसान होगा,
काबिल बनके, ऐसा कुछ लगा था,
ये समझके, शायद तुझसे,
दूर मैं, खुद हो चला था...

ग़लती, शायद इतनी,
मैं कर गया था,
न सोचा कभी मायने,
काबिलियत का, तेरे लिए क्या था...

तुझको भी माँगा खुदा से,
पर, काबिलियत के बाद,
शायद इसी बात पे,
था वो मुझसे नाराज़...

दे तो दी, उसने,
काबिलियत थी मुझे,
वापस लौटने की, लेकिन,
न फुर्सत दी, मुझे...

देर बहुत, हो चुकी,
मगर, ये एहसास है मुझे,
बन गया हूँ काबिल, अब,
पर, खो दिया है तुझे......

Sunday, January 26, 2014

दिशा...(DIRECTION)


ग़र हो सही, तो,
क़रीब अपनों को लाती है,
वरना,
दरम्यां, फासलों को बढ़ाती है...

ग़र हो सही, तो,
मंजिलों तक पहुँचाती है,
वरना, सिर्फ,
रास्तों पे भटकाती है...

ग़र हो सही तो,
सफ़र आसान बनाती है,
वरना,
ठोकरों की मार खिलाती है...

ग़र हो सही तो,
ज़िंदगी ये, जगमगाती है,
वरना,
अंधियारों में, ज़िंदगी खो जाती है...

ग़र हो सही तो,
चेहरों पे, मुस्कान लाती है,
वरना,
दर्द कितनों को, ये दे जाती है...

ग़र हो सही तो,
सपनों को रूप दे जाती है,
वरना,
सपनों को, ये सुला जाती है...

ग़र हो सही तो,
“ताजमहल” बनवा जाती है,
वरना,
“बारूद” इसपे बरसा जाती है...

ग़र हो सही तो,
“सार्थक” ज़िंदगी कहलाती है,
वरना, 
“व्यर्थ" यूँ ही चली जाती है.....