गुनगुनाती कलम
अल्फ़ाज़ों में बयां होते हैं, कभी खुशी तो कभी ग़म, इन्हें रचनाओं में पिरोती, मेरी "गुनगुनाती कलम"
Pages
Home
Monday, March 3, 2014
गुरुवर...
हैं परम श्रद्धेय
,
ये "गुरुवर"
,
हम जिनको
,
शीष नवाते हैं
,
मंजिल पर पहुंचाकर हमको
,
खुद ज्योति स्तम्भ बन जाते है।
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment