गुनगुनाती कलम
अल्फ़ाज़ों में बयां होते हैं, कभी खुशी तो कभी ग़म, इन्हें रचनाओं में पिरोती, मेरी "गुनगुनाती कलम"
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Sunday, February 9, 2014
ज़िद...(THE OBSTINACY)
तूफानों से कहदे कोई, न गुजरे हमारी गलियों से,
वजूद खो चुके हैं बवंडर कई, हमारी जिद के आगे....
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