गुनगुनाती कलम
अल्फ़ाज़ों में बयां होते हैं, कभी खुशी तो कभी ग़म, इन्हें रचनाओं में पिरोती, मेरी "गुनगुनाती कलम"
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Saturday, March 8, 2014
दुआ....
तू जिधर देखे,
वो मंज़र गुलशन बन जाए,
हर कदम तेरा,
सपनों की मंजिल बन जाए,
आज है बस इतनी सी दुआ,
तुझे इस जहाँ की हर ख़ुशी मिल जाए
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