इक हैं, जो आसमां का,
सर पे बोझ लेके चलते हैं,
इक हैं, जो आसमानों में,
उड़ उड़ के मचलते हैंI
इक हैं जिन्हें, खुशियों का,
अहसास नहीं होता है,
इक हैं जो ग़मों को भी,
खुशियों की तरह जीते हैI
इक हैं, जो हरदम, “ऊपर” को,
नीचे से खींचते हैं,
इक हैं, जो हरदम, ऊपर से,
“नीचे” को खींचते हैंI
इक हैं, जो उम्र, बीत जाने की,
बात करते हैं,
इक हैं, जो उम्र,
जीने की बात करते हैंI
इक हैं, जो किस्मत के लिए,
खुद को बनाते रहते हैं,
इक हैं, जो खुद ही ,
किस्मत बनाते रहते हैंI
इक हैं, जो जूतों के लिए,
दिन भर रोते रहते हैं,
इक हैं, जो पैरों के शुक्र पे,
दौड़ों को जीत लेते हैंI
इक हैं, जो आंसुओं की बाढ़ में,
आशियाने उजाड़ लेते हैं,
इक हैं, जो लंगर डाल के,
तूफानों को घर बना लेते हैंI
इक हैं, जो अन्धेरी रात में,
घर से नहीं निकलते हैं,
इक हैं, जो टिमटिम तारों को,
दिया मानकर चलते हैंI
इक हैं, जो मर मर के,
धारा के अनुकूल बहते हैं,
इक हैं, जो धारा के प्रतिकूल,
बहके “जीवन” जीते हैंI.........28/09/2013