रात न ये ख़त्म होगी,
ख़त्म होगा, न ये अँधेरा, चाहकर भी, न पास होगा, अब मेरे कोई सबेरा....
रात दिन अब दर्द की, तेज़ आंधियां चलेंगी, हर घड़ी, हर पल मुझे, नईं नईं, मुश्किलें मिलेंगी...
फूल भी, ये रास्तों के, शूल बनके अब चुभेंगे, बिन तेरे, अब ये लम्हे, नाग, बन बन के डसेंगे...
मेरे घर का रास्ता, अब बहारें, छोड़ देंगी, पतझरों को, मेरी गली, अब ये रोज़, मोड़ देंगी....
धीरे धीरे, फिर ये ज़िंदगी, साथ मेरा, छोड़ देगी, मौत आके, चुपके चुपके, रिश्ता मुझसे, जोड़ लेगी...
मरने के बाद, न जलना, इस चिता, को आग से, खुद ही जल जाऊँगा, यारों, उसकी सिसकती “आह”से........
रात न ये ख़त्म होगी,
ख़त्म होगा, न ये अँधेरा,
चाहकर भी, न पास होगा,
अब मेरे कोई सबेरा....
रात दिन अब दर्द की,
तेज़ आंधियां चलेंगी,
हर घड़ी, हर पल मुझे,
नईं नईं, मुश्किलें मिलेंगी...
फूल भी, ये रास्तों के,
शूल बनके अब चुभेंगे,
बिन तेरे, अब ये लम्हे,
नाग, बन बन के डसेंगे...
मेरे घर का रास्ता,
अब बहारें, छोड़ देंगी,
पतझरों को, मेरी गली,
अब ये रोज़, मोड़ देंगी....
धीरे धीरे, फिर ये ज़िंदगी,
साथ मेरा, छोड़ देगी,
मौत आके, चुपके चुपके,
रिश्ता मुझसे, जोड़ लेगी...
मरने के बाद, न जलना,
इस चिता, को आग से,
खुद ही जल जाऊँगा, यारों,
उसकी सिसकती “आह”से........
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