गुनगुनाती कलम
अल्फ़ाज़ों में बयां होते हैं, कभी खुशी तो कभी ग़म, इन्हें रचनाओं में पिरोती, मेरी "गुनगुनाती कलम"
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Saturday, February 16, 2013
ठोकरें.... (STUMBLES)
क्यूँ बदनाम करें हम, रास्तों के पत्थरों को,
आदत है ठोकरें खाने की, इन कमबख्त कदमों को.....
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