रोता था मैं, तूने हँसना सिखाया,
गोदी में अपनी, मुझको उठाया....
गिरता था मैं, सम्भलना सिखाया,
ऊँगली पकड़ के, चलना सिखाया...
रूठा कभी, तूने मुझको मनाया,
रोया कभी, अपने सीने से लगाया...
खुद जाग जाग, तूने मुझको सुलाया,
खुद भूखे रहके, तूने मुझको खिलाया...
“गुरु” बनके तूने, मुझको सिखाया,
अच्छा, बुरा क्या?, ये मुझको बताया...
तेरे काले टीके ने, दूनियाँ की नज़रों से बचाया,
मेरी बालाओं को, सदा तूने अपना बनाया...
हौसलों ने तेरे, आगे बढ़ना सिखाया,
दुआओं ने तेरी, मंजिलों तक पहुँचाया....
है कण कण ॠणी मेरा, है तेरे चरणों में समर्पित,
ये जो कुछ भी मैंने, इस जीवन में पाया....
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