चमक हीरों की भी, फीकी पड़ जाती है,
हर एक बूंद फिसलती है जब, उसकी ज़ुल्फों से !
chamak heeron ki bhi, feeki pad jati hai,
har ek bund fisalti hai jab, uski zulfon se !
अल्फ़ाज़ों में बयां होते हैं, कभी खुशी तो कभी ग़म, इन्हें रचनाओं में पिरोती, मेरी "गुनगुनाती कलम"