वो कहतें हैं अक्सर, ये ज़िन्दगी, ग़मों से भरी पड़ी हैं, हर गली, हर मोड़ पे, एक नई मुश्किल खड़ी है....
हमने कहा, चलो आज हम, तुम्हारे ग़म गिनते हैं, हर एक ख़ुशी के बाद, एक ग़म को चुनते हैं...
कुछ लम्हे थे बीते, न रह सका वो, कुछ बोले बिना, रह गयीं थी सिर्फ खुशियाँ, जिसको कभी नहीं, था उसने गिना..
फिर बोला को, क्यूँ हम? इस अंधी राह पे चलते हैं, होते नहीं खुश, अपनी ख़ुशी पे, औरों की ख़ुशी पे, हम जलते हैं...
हमने कहा, क्या बताऊँ यार तुम्हे, हर बार यही क्यूँ होता है, जो है मिला वो कुछ भी नहीं, “थोड़ा सा और” यही सोच दिल रोता है...
हमने भी कहा आखिर, कुछ नहीं, ये तो दुनिया का दस्तूर है, फूलों के साथ, गुलशन में, होना कुछ काँटों का भी, जरूर है !!
वो कहतें हैं अक्सर,
ये ज़िन्दगी, ग़मों से भरी पड़ी हैं,
हर गली, हर मोड़ पे,
एक नई मुश्किल खड़ी है....
हमने कहा, चलो आज हम,
तुम्हारे ग़म गिनते हैं,
हर एक ख़ुशी के बाद,
एक ग़म को चुनते हैं...
कुछ लम्हे थे बीते,
न रह सका वो, कुछ बोले बिना,
रह गयीं थी सिर्फ खुशियाँ,
जिसको कभी नहीं, था उसने गिना..
फिर बोला को, क्यूँ हम?
इस अंधी राह पे चलते हैं,
होते नहीं खुश, अपनी ख़ुशी पे,
औरों की ख़ुशी पे, हम जलते हैं...
हमने कहा, क्या बताऊँ यार तुम्हे,
हर बार यही क्यूँ होता है,
जो है मिला वो कुछ भी नहीं,
“थोड़ा सा और” यही सोच दिल रोता है...
हमने भी कहा आखिर,
कुछ नहीं, ये तो दुनिया का दस्तूर है,
फूलों के साथ, गुलशन में,
होना कुछ काँटों का भी, जरूर है !!
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