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Wednesday, February 27, 2013

PRERANA... (THE MOTIVATION)


jise dekh ke, suraj chadhta hai,
jise dekh ke, rahi badhta hai....
jise dekh ke, sawan aata hai,
jise dekh, papiha gata hai.....


jise dekh ke, badal chhate hain,
jise dekh ke, jharne gate hain..
jise dekh ke, baharein aati hain,
jise chhuke pawan, gungunati hai......



jise dekh ke, nadiyan behti hai,
jise dekh, lehren kuchh kehti hain..
jise dekh ke, kaliyan khilti hai,
jise dekh ke, khushiya milti hai....



jise dekh ke, suraj dhalta hai,
jise dekh ke, chand nikalta hai…
jise dekh ke, basant aa jata hai,
jise dekh, indradhanush khil jata hai….


aisi khoobsurat zindagi ki, prerana ho tum……..

Saturday, February 16, 2013

ठोकरें.... (STUMBLES)



क्यूँ बदनाम करें हम, रास्तों के पत्थरों को, 

आदत है ठोकरें खाने की, इन कमबख्त कदमों को..... 


Tuesday, February 12, 2013

SOCIAL NETWORKING FRIEND


he knows me, but can't understand me.
he can talk to me, but can't sit silently with me. 
he can regret, but can't hug me when i need it.
he can remember me, but can't forget anything for me.
he can make me smile, but can't wipe off my tears. 
he is my dear "Social Networking Friend".....




 

Sunday, February 10, 2013

आह !

रात न ये ख़त्म होगी,
ख़त्म होगा, न ये अँधेरा,
चाहकर भी, न पास होगा,
अब मेरे कोई सबेरा....

रात दिन अब दर्द की,
तेज़ आंधियां चलेंगी,
हर घड़ी, हर पल मुझे,
नईं नईं, मुश्किलें मिलेंगी...

फूल भी, ये रास्तों के,
शूल बनके अब चुभेंगे,
बिन तेरे, अब ये लम्हे,
नाग, बन बन के डसेंगे...

मेरे घर का रास्ता,
अब बहारें, छोड़ देंगी,
पतझरों को, मेरी गली,
अब ये रोज़, मोड़ देंगी....

धीरे धीरे, फिर ये ज़िंदगी,
साथ मेरा, छोड़ देगी,
मौत आके, चुपके चुपके,
रिश्ता मुझसे, जोड़ लेगी...

मरने के बाद, न जलना,
इस चिता, को आग से,
खुद ही जल जाऊँगा, यारों,
उसकी सिसकती “आह”से........

तेरा साथ... (WITH YOU)



जब जब, रातों ने है डराया,
और रुलाया, ख्वाबों ने,
तब तब, तेरे साथ है पाया,
और हाथ तेरा, इन हाथो में...

जब जब, कोई दर्द है पाया,
और जख्म दिया, इन साथों ने,
तब तब, तेरे साथ है पाया,
और हाथ तेरा, इन हाथो में...

जब जब कोई, हुआ पराया,
और भुलाया, नातों ने,
तब तब, तेरे साथ है पाया,
और हाथ तेरा, इन हाथो में...

नहीं है कोई, शिकवा गिला अब,
इन दोनों, कायनातों से,
जब साथ है तू, और साथ है मेरे,
उठती दुआएं, तेरे हाथों से..  

नज़रिया....



वो कहतें हैं अक्सर,
ये ज़िन्दगी, ग़मों से भरी पड़ी हैं,
हर गली, हर मोड़ पे,
एक नई मुश्किल खड़ी है....

हमने कहा, चलो आज हम,
तुम्हारे ग़म गिनते हैं,
हर एक ख़ुशी के बाद,
एक ग़म को चुनते हैं...

कुछ लम्हे थे बीते,
न रह सका वो, कुछ बोले बिना,
रह गयीं थी सिर्फ खुशियाँ,
जिसको कभी नहीं, था उसने गिना..

फिर बोला को, क्यूँ हम?
इस अंधी राह पे चलते हैं,
होते नहीं खुश, अपनी ख़ुशी पे,
औरों की ख़ुशी पे, हम जलते हैं...

हमने कहा, क्या बताऊँ यार तुम्हे,
हर बार यही क्यूँ होता है,
जो है मिला वो कुछ भी नहीं,
थोड़ा सा और यही सोच दिल रोता है...

हमने भी कहा आखिर,
कुछ नहीं, ये तो दुनिया का दस्तूर है,
फूलों के साथ, गुलशन में,
होना कुछ काँटों का भी, जरूर है !!

Saturday, February 9, 2013

सहारे...


कैसे करे उम्मीद कोई, इन सहारों से, 


कन्धों की तलाश में हरदम, जो खुद भटकते रहते हैं !!