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Wednesday, October 8, 2014

इंसानियत...

न ही तू हिन्दू है, और न ही तू मुस्लिम, 

और जो है तू, वो है तुझमे ही छुपा। 


करते हैं जो नमन, वंदना किसी मूरत की,

उठ जाते है वही हाथ, बनके किसी बंदे की दुआ। 


झुकता है जो सर, मंदिरों की दहलीज़ पर, 

करता है वही झुकके, मस्जिदों मे सजदा। 


बंद होती हैं जो आँखें, प्रार्थना के लिए, 

नमाज मे वही आँखें, बस देखती हैं खुदा।


Tuesday, May 20, 2014

ख़्वाहिश...

वैसे तो, हर ख़्वाहिश अपनी पूरी है,

फिर भी ज़िंदगी ये लगती, अधूरी है,

ये कमी भी शायद, हो जाए पूरी,

बस आना तेरा, मेरी ज़िंदगी मे जरूरी है।


 waise to, har khwahish apni puri hai,

phir bhi zindagi ye lagti, adhuri hai, 

ye kami bhi shayad, ho jaye puri,

bas aana tera,  meri zindagi me zaruri hai. 

Sunday, May 18, 2014

अपने..

अपना ही कोई दे सकता है, साथ मुसीबतों मे, 

छोड़ देता है साया, इसलिए साथ अंधरों मे! 


apna hi koi de sakta hai, saath musibaton me,

chhod deta hai saaya, isliye saath andheron me.
  

वक़्त...

सुना है क़रीब अपनों के, ये ले जातीं हैं तुम्हें, 

गुज़रना जरूर एक बार, बुरे वक़्त की गलियों से।

 
suna hai kareeb apno ke, ye le jatin hain tumhe,

guzarna zarur ek baar, bure waqt ki galiyon se...