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Sunday, January 26, 2014

दिशा...(DIRECTION)


ग़र हो सही, तो,
क़रीब अपनों को लाती है,
वरना,
दरम्यां, फासलों को बढ़ाती है...

ग़र हो सही, तो,
मंजिलों तक पहुँचाती है,
वरना, सिर्फ,
रास्तों पे भटकाती है...

ग़र हो सही तो,
सफ़र आसान बनाती है,
वरना,
ठोकरों की मार खिलाती है...

ग़र हो सही तो,
ज़िंदगी ये, जगमगाती है,
वरना,
अंधियारों में, ज़िंदगी खो जाती है...

ग़र हो सही तो,
चेहरों पे, मुस्कान लाती है,
वरना,
दर्द कितनों को, ये दे जाती है...

ग़र हो सही तो,
सपनों को रूप दे जाती है,
वरना,
सपनों को, ये सुला जाती है...

ग़र हो सही तो,
“ताजमहल” बनवा जाती है,
वरना,
“बारूद” इसपे बरसा जाती है...

ग़र हो सही तो,
“सार्थक” ज़िंदगी कहलाती है,
वरना, 
“व्यर्थ" यूँ ही चली जाती है.....  

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