जब गिरते नहीं पत्ते सूखे,
नाज़ुक से पत्ते फिर उगते कहाँ से ?
जब गिरते नहीं वृक्षों से फल,
बीज नए वृक्षों के फिर बनते कहाँ से ?
जब गिरतीं नहीं बारिश की बूंदें,
सीप मे मोती फिर बनती कहाँ से ?
जब गिरती नहीं घटाओं से बिजली,
चमक आसमानों मे फिर बनती कहाँ से ?
जब गिरती नहीं बर्फ चट्टानों पर,
हिमालय फिर तब बनते कहाँ से ?
जब गिरती नहीं चींटी,
चट्टानों से हौसले फिर बनते कहाँ से ?
जब गिरती नहीं कोई धारा,
नदियाँ फिर भला बनती कहाँ से ?
जब गिरती नहीं कोई नदिया,
समुंदर भला फिर बनते कहाँ से ?
जब गिरता नहीं कोई बच्चा,
चलता भला फिर वो कहाँ से ?
और गिरता नहीं गर कोई जहां मे,
संभलता भला फिर कोई कहाँ से?
संभलता भला फिर कोई कहाँ से?
Nice Line
ReplyDeleteVery Heart Touching lines
Thanks a lot !!
DeleteThanks a lot !!
ReplyDelete