(वो... जो निभाती है
कई किरदार हमारे जीवन मे। उसी के कुछ किरदारों को समर्पित एक छोटी सी रचना!)
हाथों
को रखा उसने,
जब
सर पर मेरे,
स्वर्ग
बन गया वो,
जो
अब तक एक जहान था।
कदमों
ने उसके छुआ,
जब
आँगन को मेरे,
घर
बन गया वो,
जो
अब तक मकान था।
प्रेरणा
जो दी उसने,
हौसलों
को मेरे,
हकीकत
बन गया वो,
जो
अब तक एक अरमान था।
और, चलने लगी,
जब
संग वो मेरे,
मंज़िल
बन गया वो,
जो
अब तक एक मुक़ाम था।

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