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Friday, February 6, 2015

शक

सलामत रहे जो आशियाने, वक़्त के तूफानो मे, 
ढह गए वो सारे, शक के एक झोंके से !


4 comments:

  1. शक चीज ही ऐसी है ... बहुत उम्दा ...

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    1. शुक्रिया दिगंबर जी :)

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    2. बहुत गहराई के साथ सरल लिखते है आप बेहतरीन

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    3. बहुत बहुत धन्यवाद जयंत जी :)

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