अल्फ़ाज़ों में बयां होते हैं, कभी खुशी तो कभी ग़म, इन्हें रचनाओं में पिरोती, मेरी "गुनगुनाती कलम"
शक चीज ही ऐसी है ... बहुत उम्दा ...
शुक्रिया दिगंबर जी :)
बहुत गहराई के साथ सरल लिखते है आप बेहतरीन
बहुत बहुत धन्यवाद जयंत जी :)
शक चीज ही ऐसी है ... बहुत उम्दा ...
ReplyDeleteशुक्रिया दिगंबर जी :)
Deleteबहुत गहराई के साथ सरल लिखते है आप बेहतरीन
Deleteबहुत बहुत धन्यवाद जयंत जी :)
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