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Friday, August 15, 2025

क्यों फ़र्क है तुम्हारे और मेरे धर्म मे ?

 


तुम भी जन्म लेते हो

            और मरते हो मेरी तरह,

फिर क्यों फर्क है,

            तुम्हारे और मेरे धर्म मे?

 

तुम भी हँसते हो,

            और रोते हो मेरी तरह,

फिर क्यों फर्क है,

            तुम्हारे और मेरे धर्म मे?

 

तुम भी भूखे होते हो,

            और प्यासे मेरी तरह

फिर क्यों फर्क है,

            तुम्हारे और मेरे धर्म मे?

 

तुम भी सांस लेते हो

            और जीते हो मेरी तरह,

फिर क्यों फर्क है,

            तुम्हारे और मेरे धर्म मे?

 

गिनती तुम्हारी धडकनों की,

            चलती है मेरी तरह,

फिर क्यों फर्क है,

            तुम्हारे और मेरे धर्म मे?

 

हर बूंद रक्त लाल की तुम्हारे,

            दिखती है मेरे रक्त की तरह

फिर क्यों फर्क है,

            तुम्हारे और मेरे धर्म मे?

 

हंसी और आँसू की तुम्हारे,

            भाषा भी है मेरी तरह,

फिर क्यों फर्क है,

            तुम्हारे और मेरे धर्म मे?

 

दर पर उपर वाले के तुम,

            झुकते हो मेरी तरह,

फिर क्यों फर्क है,

            तुम्हारे और मेरे धर्म मे?

 

तुम भी सोचो, हम भी सोचे,

            इस सवाल का उत्तर खोंजे,

कि, क्यों फ़र्क है,

            तुम्हारे और मेरे धर्म मे?

 

जिसने बनाया हमको,

            पर, शायद, नहीं हमारे धर्म को

इसलिए फर्क है,

            तुम्हारे और मेरे धर्म मे।  

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