इस तरह हार का ग़म मनाया नहीं करते,
खुशी के लम्हों को, यूं भुलाया नहीं करते।
माना कोशिशें बेकार हो गई हैं इस बार,
अपने हौसलों को, यूं गिराया नहीं करते।
माना कि चाहत थी चाँद छूने के तुम्हें,
मुट्ठी मे आए तारों को, यूं गिराया नहीं करते।
ग़म और खुशी के लिए, बरसते हैं ये आँखों से,
हार और जीत मे ये आँसू, यूं बहाया नहीं करते।
जरूरी है अपने गिरेबान मे झांकना,
खुद को मयूसियों मे मगर, दफनाया नहीं करते।
पढ़ सकते हैं हम, तुम्हारे चेहरों कि दास्तां,
अश्क लेकर इन आंखो मे, औरों को रुलाया नहीं करते।
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