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Thursday, March 14, 2013

मेरी माँ....





रोता था मैं, तूने हँसना सिखाया,
गोदी में अपनी, मुझको उठाया....

गिरता था मैं, सम्भलना सिखाया,
ऊँगली पकड़ के, चलना सिखाया...

रूठा कभी, तूने मुझको मनाया,
रोया कभी, अपने सीने से लगाया...

खुद जाग जाग, तूने मुझको सुलाया,
खुद भूखे रहके, तूने मुझको खिलाया...

गुरु बनके तूने, मुझको सिखाया,
अच्छा, बुरा क्या?, ये मुझको बताया...

तेरे काले टीके ने, दूनियाँ की नज़रों से बचाया,
मेरी बालाओं को, सदा तूने अपना बनाया...

हौसलों ने तेरे, आगे बढ़ना सिखाया,
दुआओं ने तेरी, मंजिलों तक पहुँचाया....

है कण कण ॠणी मेरा, है तेरे चरणों में समर्पित,
ये जो कुछ भी मैंने, इस जीवन में पाया.... 

Sunday, March 10, 2013

अनकही...



इक वो हैं,
जो अहसानों को छुपाते नहीं,
एक हम हैं,
जो कुछ भी जताते नहीं...

वो समझते हैं,
हम खुश हैं, उनकी महफ़िल में,
ग़मों को क्यूंकि अपने,
उन्हें हम बताते नहीं....

गुनाह करके भी खुदको,
बेगुनाह समझते हैं वो,
एहसास क्यूंकि उनको,
कभी हम दिलाते नहीं...

शिकवे और गिले ही बस,
गिनते रहते हैं वो,
वफाओं का हमारी,
वो जश्न मानते नहीं...

अपनी जुबान भी,
नहीं करती, उनका कोई गिला,
और खामोशियों को वो,
वो समझ पाते नहीं...

सिर्फ आँखों के,
आंसुओं को देख पाते हैं वो,
ये दिल भी रो सकता है,
वो ये समझ पाते नहीं...

और हद है! खुदा भी करता है,
वफ़ा उन्ही के साथ,
हाथ अपने लिए क्यूंकि,
कभी हम फैलाते नहीं...  

Saturday, March 2, 2013

गहराई आँखों की ....


 मरना ही है ग़र डूबके, उन आँखों की गहराईयों में, 

मुझे बख्श मौत दे, इसी लम्हा मेरे खुदा....