किस बात की जल्दी है
तुमको?
कुछ देर सही, पर ठहरो ज़रा।
करनी है कई बातें मुझे,
थक सा गया हूँ यूं खड़ा
खड़ा।
मैंने तो नहीं मांगा
था,
ये सम्मान जिसे तुम कहते
हो।
मेरे आदर्शों को जब तुम,
ताक पे हर दम रखते हो।
चंद रुपयों मे अक्सर, नियमो का,
सौदा होते देखता हूँ,
लोगों की इस भीड़ मे,
स्वार्थ को देखता हूँ।
कचरा कोई फेंकता है,
तो कोई थूकता सड़कों पर,
कैसे मैं खड़ा रहूँ जब,
कोई रोंदता हैं इन सड़कों
पर।
हद हो जाती है, सब्र की मेरे,
नाक के नीचे, रिश्वत कोई लेता
है,
लाचारी मे फिर जब, कोई
तंत्र को ताने देता है।
रहता हूँ इन सड़कों पर, मुझे
इन्हे ही अपना घर समझने
दो।
जैसे रखते हो स्वच्छ
तुम घर को,
स्वच्छ इन्हे भी रहने
दो।
नहीं मांगता रोज़ मैं
तुमसे,
पुष्पों और पत्तों की
माला,
जब भी गुजरो एक नज़र बस,
आदर से ही देख लिया करो।
हूँ अगर आदर्श तुम्हारा,
राह पे मेरी चला करो,
सड़कों पर तो बैठा दिया
है,
दिल मे भी कभी रख लिया
करो।
जानता हूँ, एक पत्थर हूँ
मैं,
नहीं कहीं चल सकता हूँ
मैं।
चल लिए गर, दो कदम भीआदर्शों
पर मेरे,
इस दुनिया की तस्वीर
बादल सकता हूँ मैं।