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Sunday, January 13, 2013

क़र्ज़...



उम्मीद नहीं करते, इस जिंदगी से कोई अब, 

जीतें हैं सिर्फ इसलिए, कि कोई क़र्ज़ चूका दें हम !! 



शिकायत...


कैसे करें शिकायत?, बरबादियों की हम खुदा से, 

आशियाने अपने खुद हमने, तूफानों में बनाये थे... 


मजबूरी...



कैसे करें इज़हार हम, अपने दर्द का ?, 


आँसूं भी साथ कमबख्त, देते नहीं अब हमारा,  


ग़लतियाँ.... (MISTAKES)


ये माना कि ग़लतियाँ, कुछ सबक हैं सिखातीं, 

सिर्फ सबक के लिए मगर, ग़लतियाँ की नहीं जातीं,