उम्मीद नहीं करते, इस जिंदगी से कोई अब,
जीतें हैं सिर्फ इसलिए, कि कोई क़र्ज़ चूका दें हम !!
उम्मीद नहीं करते, इस जिंदगी से कोई अब,
जीतें हैं सिर्फ इसलिए, कि कोई क़र्ज़ चूका दें हम !!
अल्फ़ाज़ों में बयां होते हैं, कभी खुशी तो कभी ग़म, इन्हें रचनाओं में पिरोती, मेरी "गुनगुनाती कलम"