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Monday, February 5, 2018

स्वार्थ...


स्वार्थी ! कौन?
मैं, तुम या फिर हम?
शायद “हम”
हाँ, सचमुच हम।

धरा, जिसने दी,
पैर रखने को जमीन,
हमने क्या दिया उसे?
गंदगी, सूखा, बाढ़ !

हवा, जिसने दी खुशबू,
और साँसे,
हमने क्या दिया उसे?
रसायन और गैसें!

जल, जो हैं जीवन का
आधार,
हमने क्या दिया इसको?
नदी, तालाब, कुओं का नाश!
और जो शेष रहे उनको गंदगी !

आकाश, जो है, हमारा आवरण
और देता हमे जीने, का पर्यावरण।
क्या दिया इसको हमने?
जहरीली गैस और धुआँ
या फिर शहरों की धूल !

अग्नि ! इसको कुछ
नहीं दिया !!
क्योंकि हमने अभी
नहीं इसको वश मे किया।

पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि
और आकाश,
जो देते हैं खाना, पीना,
और प्रकाश!

सम्मान करेंगे इनका,
तो जनम खिल जाएगा।
नहीं तो अधोगति के बाद
खाक मे सब मिल जाएगा!