गुनगुनाती कलम
अल्फ़ाज़ों में बयां होते हैं, कभी खुशी तो कभी ग़म, इन्हें रचनाओं में पिरोती, मेरी "गुनगुनाती कलम"
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Saturday, February 14, 2015
ख़ामोशी
जरुरी नहीं मोहब्बत में, इज़हार ए जुबां
मोहब्बत की इबारत है, ख़ामोशी उस ताज की !
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Friday, February 6, 2015
शक
सलामत रहे जो आशियाने, वक़्त के तूफानो मे,
ढह गए वो सारे, शक के एक झोंके से !
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