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Sunday, September 29, 2013

दो लोग..... (POSITIVE VS NEGATIVE)



इक हैंजो आसमां का,
सर पे बोझ लेके चलते हैं,
इक हैंजो आसमानों में,
उड़ उड़ के मचलते हैंI

इक हैं जिन्हेंखुशियों का,
अहसास नहीं होता है,
इक हैं जो ग़मों को भी,
खुशियों की तरह जीते हैI

इक हैंजो हरदम, “ऊपर” को,
नीचे से खींचते हैं,
इक हैंजो हरदमऊपर से,
नीचे” को खींचते हैंI

इक हैंजो उम्रबीत जाने की,
बात करते हैं,
इक हैंजो उम्र,
जीने की बात करते हैंI

इक हैंजो किस्मत के लिए,
खुद को बनाते रहते हैं,
इक हैंजो खुद ही ,
किस्मत बनाते रहते हैंI

इक हैंजो जूतों के लिए,
दिन भर रोते रहते हैं,
इक हैंजो पैरों के शुक्र पे,
दौड़ों को जीत लेते हैंI

इक हैंजो आंसुओं की बाढ़ में,
आशियाने उजाड़ लेते हैं,
इक हैंजो लंगर डाल के,
तूफानों को घर बना लेते हैंI

इक हैंजो अन्धेरी रात में,
घर से नहीं निकलते हैं,
इक हैंजो टिमटिम तारों को,
दिया मानकर चलते हैंI

इक हैंजो मर मर के,
धारा के अनुकूल बहते हैं,
इक हैंजो धारा के प्रतिकूल,
बहके “जीवन” जीते हैंI.........28/09/2013