गुनगुनाती कलम
अल्फ़ाज़ों में बयां होते हैं, कभी खुशी तो कभी ग़म, इन्हें रचनाओं में पिरोती, मेरी "गुनगुनाती कलम"
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Saturday, April 20, 2013
हमसफ़र...
कैसे बना लूँ?, हमसफ़र तुम्हे अपना,
ये भी पता नहीं हमें, कि जाना कहाँ है !!
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